श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया हरछठ पर्व

बिलासपुर । हरछठ यानी हलषष्ठी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर माताओं ने व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। अभिषेक नगर फेज-1 स्थित ओंकारेश्वर शिव मंदिर में हरछठ पूजा का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें कॉलोनी की बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। मंदिर परिसर में पूजा-पाठ के साथ हरछठ की कथा का भी वाचन किया गया।
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां की लोक-संस्कृति का गहरा रिश्ता खेती-किसानी, प्रकृति और ग्रामीण जीवन से रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में मनाए जाने वाले कृषि आधारित पर्वों की अपनी अलग आंचलिक पहचान है।

इन्हीं प्रमुख लोकपर्वों में से एक है हरछठ, जिसे कमरछठ, हलछठ, हलषष्ठी और ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखती हैं।
बिलासपुर के अभिषेक नगर फेज-1 स्थित ओंकारेश्वर शिव मंदिर में भी हरछठ पर्व को लेकर विशेष आयोजन किया गया। पूजा में शामिल होने के लिए कॉलोनी की बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर परिसर में पहुंचीं। महिलाओं ने व्रत रखकर पूरे विधि-विधान के साथ हरछठ माता की पूजा-अर्चना की।
इस दौरान मंदिर के पंडित ने विधि-विधान से पूजा-पाठ कराया। पूजा के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया और संतान की दीर्घायु एवं परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। पूजा के बाद मंदिर के पंडित द्वारा हरछठ व्रत से जुड़ी कथा का वाचन भी किया गया। महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक कथा सुनी और भगवान बलराम का स्मरण करते हुए अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
हरछठ पर्व की खासियत यह है कि इसमें केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक जीवनशैली और खेती-किसानी की संस्कृति भी दिखाई देती है। इस पर्व में कृषि, प्रकृति और ग्रामीण जीवन से जुड़ी मान्यताओं का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा और महिलाओं ने एक-दूसरे को हरछठ पर्व की शुभकामनाएं दीं।कुल मिलाकर, अभिषेक नगर के ओंकारेश्वर शिव मंदिर में हरछठ का पर्व श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने व्रत और पूजा में शामिल होकर अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।