कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर में ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम के दूसरे दिन विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षा प्रणाली, मानसिक एकाग्रता एवं एनएसएस की दी गई जानकारी

नव-प्रवेशित विद्यार्थियों को शैक्षणिक अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दिया संदेश
बिलासपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, सरकंडा, बिलासपुर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित ‘दीक्षारंभ’ छात्र प्रेरण कार्यक्रम के दूसरे दिन बुधवार, 16 सितंबर 2026 को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न ज्ञानवर्धक, संवादात्मक एवं मार्गदर्शनपरक सत्र आयोजित किए गए।

दीक्षारंभ कार्यक्रम का उद्देश्य नव-प्रवेशित विद्यार्थियों को महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें परीक्षा प्रणाली, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व, मानसिक एकाग्रता, तनाव प्रबंधन तथा व्यक्तित्व विकास के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्रदान करना है। दूसरे दिन आयोजित सत्रों में विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि उच्च शिक्षा केवल पाठ्यक्रम एवं परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, अनुशासन, व्यक्तित्व, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता के विकास की भी महत्वपूर्ण अवस्था है।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इसके पश्चात दिनभर विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित किया गया।

शैक्षणिक गतिविधियों एवं परीक्षा प्रणाली की दी गई विस्तृत जानकारी
प्रथम सत्र में ‘शैक्षणिक गतिविधियां एवं परीक्षा प्रणाली तथा नियम’ विषय पर डॉ. अजय टेगर, परीक्षा प्रभारी ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं से विस्तारपूर्वक अवगत कराया।
उन्होंने विद्यार्थियों को पंजीयन प्रक्रिया, शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षा संबंधी नियमों, आवश्यक औपचारिकताओं तथा विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को समझने के साथ-साथ विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन, कक्षा में सक्रिय सहभागिता तथा शैक्षणिक अनुशासन के महत्व से अवगत कराया।
डॉ. टेगर ने विद्यार्थियों से कहा कि महाविद्यालयीन जीवन में प्रारंभ से ही निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी रखना उनके लिए अत्यंत उपयोगी होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को परीक्षा एवं शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित किसी भी प्रकार की शंका होने पर संबंधित विभाग अथवा महाविद्यालय के अधिकारियों से समय पर मार्गदर्शन प्राप्त करने की सलाह दी। सत्र के दौरान विद्यार्थियों की विभिन्न जिज्ञासाओं एवं शंकाओं का समाधान भी किया गया।
एनएसएस के माध्यम से सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश
द्वितीय सत्र में ‘राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियां’ विषय पर अजीत विलियम्स, वैज्ञानिक (वानिकी) एवं कार्यक्रम अधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना ने विद्यार्थियों को एनएसएस के उद्देश्यों, गतिविधियों एवं कार्यप्रणाली की जानकारी प्रदान की।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थियों में सेवा भावना, सामाजिक संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता, सामुदायिक सहभागिता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों, समुदायों एवं स्थानीय संस्थाओं के साथ जुड़कर सामाजिक जागरूकता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण तथा ग्रामीण विकास जैसे कार्यों में विद्यार्थियों की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विद्यार्थियों को केवल कक्षा और प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर समाज और समुदाय की वास्तविक परिस्थितियों को समझने तथा अपने ज्ञान का उपयोग सामाजिक हित में करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए ग्रामीण समाज से जुड़ाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कृषि, प्राकृतिक संसाधन, पर्यावरण एवं ग्रामीण आजीविका एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
विद्यार्थियों को एनएसएस के अंतर्गत आयोजित होने वाली विभिन्न सेवा, जागरूकता एवं सामुदायिक विकास गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया गया।
‘मन को नियंत्रित करने की कला’ ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित
दिवस के तृतीय एवं अत्यंत महत्वपूर्ण सत्र में ‘मन को नियंत्रित करने की कला’ विषय पर द अक्षयपात्र फाउंडेशन (इस्कॉन संस्थान) के प्रचारक एवं परामर्शदाता श्री गौर श्याम दास जी ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायी एवं उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया।
उन्होंने विद्यार्थी जीवन में मानसिक एकाग्रता, सकारात्मक सोच, आत्म-अनुशासन, तनाव प्रबंधन एवं संतुलित जीवनशैली के महत्व को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि अध्ययन के दौरान मन की एकाग्रता बनाए रखना, अनावश्यक विचलनों से बचना तथा समय और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करना सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में अनुशासन विकसित करने, अपने लक्ष्यों के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण रखने तथा सकारात्मक विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों को अध्ययन के दौरान मोबाइल एवं अन्य अनावश्यक विकर्षणों से स्वयं को नियंत्रित रखने तथा अपनी प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के संबंध में उपयोगी सुझाव दिए।
सत्र की प्रस्तुति संवादात्मक एवं प्रेरणादायी रही। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। सत्र के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश मिला कि शैक्षणिक सफलता के साथ मानसिक संतुलन, आत्म-अनुशासन एवं सकारात्मक दृष्टिकोण भी विद्यार्थी जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास पर रहा विशेष जोर
दीक्षारंभ के दूसरे दिन आयोजित सत्रों में विद्यार्थियों को महाविद्यालयीन जीवन के विभिन्न आयामों से परिचित कराया गया। जहां एक ओर परीक्षा प्रभारी द्वारा विद्यार्थियों को शैक्षणिक एवं परीक्षा प्रणाली की व्यावहारिक जानकारी दी गई, वहीं एनएसएस सत्र के माध्यम से उन्हें समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने का अवसर मिला। मानसिक एकाग्रता एवं तनाव प्रबंधन से संबंधित सत्र ने विद्यार्थियों को अपने मन, समय एवं ऊर्जा के बेहतर प्रबंधन की दिशा में प्रेरित किया।
इस प्रकार दूसरे दिन की गतिविधियों में ‘ज्ञान, अनुशासन, सेवा और आत्म-विकास’ को प्रमुख आधार बनाया गया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता प्रदान की कि महाविद्यालयीन शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञानवान, अनुशासित, संवेदनशील, आत्मनिर्भर एवं जिम्मेदार नागरिक के रूप में स्वयं को विकसित करना भी है।
अधिष्ठाता सहित महाविद्यालय परिवार की रही सहभागिता
इस अवसर पर डॉ. एन. के. चौरे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर, डॉ. युष्मा मारू, प्रभारी शैक्षणिक, महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, सहायक प्राध्यापकगण, कृषि वैज्ञानिक, अतिथि शिक्षक एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नव-प्रवेशित विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विशेषज्ञों एवं वक्ताओं से विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम के दूसरे दिन आयोजित गतिविधियों ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था एवं परीक्षा प्रणाली को समझने, नियमों एवं अनुशासन के महत्व को जानने, सामाजिक सेवा के प्रति संवेदनशील बनने तथा मानसिक एकाग्रता एवं सकारात्मक जीवनशैली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
महाविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए उनके नए शैक्षणिक जीवन की दिशा और उद्देश्य को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर बन रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ सामाजिक चेतना, नैतिक मूल्यों, आत्म-अनुशासन एवं समग्र व्यक्तित्व विकास की भावना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।